छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस की जिस कार्रवाई को हाईकोर्ट ने अवैध बताया है, उस घटना का वीडियो सामने आया
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस की जिस कार्रवाई को हाईकोर्ट ने अवैध बताया है, उस घटना का वीडियो सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी होटल के बाहर होटल मालिक को उसकी मां के सामने डंडे से पीटते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, भिलाई स्थित एक होटल में स्मृति नगर पुलिस की बर्बरता मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने होटल संचालक आकाश कुमार साहू की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए राज्य सरकार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
साथ ही सरकार को यह छूट दी है कि, जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से यह राशि वसूल की जा सकती है।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, भिलाई के कोहका इलाके के एक होटल में 8 सितंबर 2025 को पुलिस गुमशुदा लड़की की तलाश करने जबरन घुसी थी। आरोप है कि पुलिस ने पहले होटल मैनेजर से बदतमीजी की, फिर बिना महिला पुलिस बल के होटल के एक कमरे में प्रवेश कर वहां ठहरे महिला-पुरुष को बाहर निकाल दिया।
होटल संचालक और कर्मचारियों के विरोध करने पर पुलिस ने होटल मालिक आकाश साहू (30) के साथ मारपीट की। बिना किसी FIR के उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जबरदस्ती गाड़ी में बैठाकर ले आए थे थाने
होटल मालिक आकाश ने बताया कि, जिस समय यह वारदात हुई उस वक्त मेरी मां भी मौके पर मौजूद थी। पुलिस से लगातार मुझे छोड़ने की गुहार लगाती रहीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। थाने ले जाने के बाद भी उनके साथ पिटाई की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
आकाश साहू, जो पेशे से लॉ स्टूडेंट हैं और होटल उनका एकमात्र आजीविका का साधन है। उसने अपने अधिवक्ता के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि, होटल विधिवत पंजीकृत है और सभी वैधानिक अनुमतियां ली गई हैं। होटल में ठहरे लोगों ने वैध पहचान पत्र भी दिए थे। ऐसे में पुलिस को कार्रवाई से पहले विधिसम्मत अनुमति लेनी चाहिए थी।
पुलिस बोली- सरकारी कार्य में डाला था बाधा
पुलिस ने दावा किया कि आकाश साहू ने सरकारी काम में बाधा डाला। पुलिस वाहन की चाबी छीनी और हाथापाई की। जिससे शांति भंग होने की स्थिति बनी। इसी आधार पर उन्हें बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में लिया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि किसी भी अपराध में FIR दर्ज नहीं की गई थी। महज संदेह के आधार पर जेल भेजना असंवैधानिक है।
कोर्ट ने SDM की भूमिका पर भी नाराजगी जताई
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि, बिना FIR गिरफ्तारी और हिरासत में दिया गया मानसिक तनाव अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने SDM की भूमिका पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि, उन्होंने पुलिस रिपोर्ट पर आंख मूंदकर मुहर लगा दी।
1 लाख रुपए मुआवजा देने का दिया है आदेश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ सभी आपराधिक कार्रवाई और पुलिस इस्तगासा को रद्द कर दिया है। राज्य सरकार को 4 सप्ताह के भीतर 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया गया है, देरी होने पर 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं आपराधिक न्याय प्रणाली और पुलिस पर जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। साथ ही गृह विभाग को पुलिस को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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