छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चेटवा गांव में राजस्थान से कपास तोड़ने आए मजदूरों के साथ बंधक बनाए जाने, मारपीट और मजदूरी नहीं देने का गंभीर मामला सामने आया

Jan 25, 2026 - 10:49
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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चेटवा गांव में राजस्थान से कपास तोड़ने आए मजदूरों के साथ बंधक बनाए जाने, मारपीट और मजदूरी नहीं देने का गंभीर मामला सामने आया

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चेटवा गांव में राजस्थान से कपास तोड़ने आए मजदूरों के साथ बंधक बनाए जाने, मारपीट और मजदूरी नहीं देने का गंभीर मामला सामने आया है।

मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदारों ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी, पूरी मजदूरी रोक ली और हिसाब-किताब की डायरी तक जला दी। वहीं, उन्होंने पुलिस पर भी ठेकेदारों का पक्ष लेने का आरोप लगाया गया है। मामला कुम्हारी थाना क्षेत्र का है।

महिलाएं और बच्चे भी शामिल

राजस्थान के अलवर जिले से करीब 15 मजदूर, जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, दो महीने पहले कपास तोड़ने के लिए दुर्ग लाए गए थे। मजदूरों का कहना है कि नरेश नाम के व्यक्ति ने उन्हें काम दिलाने का भरोसा दिया था।

बाद में जोगेंद्र और उसके भाई गोरा मलिक के खेत में उन्हें कपास तोड़ने का काम दिया गया। सौदा 10 रुपए प्रति किलो (100 किलो पर 1000 रुपए) तय हुआ था।

मजदूरों का 3 लाख 85 हजार रुपए बकाया

मजदूर राजकुमार के अनुसार तीन महीने में उनकी कुल मजदूरी 4 लाख 35 हजार रुपए बनती है। ठेकेदार ने 9 जनवरी को सिर्फ 50 हजार रुपए दिए, जबकि 3 लाख 85 हजार रुपए अब भी बकाया हैं।

जब मजदूरों ने अपनी मजदूरी मांगी तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। आरोप है कि जोगेंद्र और गोरा मलिक ने उन्हें गोली मारने की धमकी दी।

लेखा-जोखा की जलाई डायरी

मजदूरों का कहना है कि 22 जनवरी को ठेकेदार और उसके भाई ने उनकी वह डायरी जला दी, जिसमें पूरे काम का हिसाब दर्ज था। इसके बाद कई मजदूरों के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि 10 मजदूरों और दो बच्चों को खेत में बंधक बनाकर रखा गया था। किसी को बाहर जाने नहीं दिया जा रहा था।

एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत की

डर के कारण कुछ मजदूर भागे और कुम्हारी थाना पहुंचे। मजदूरों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी मदद करने के बजाय ठेकेदारों का साथ दिया। पुलिस की मौजूदगी में भी ठेकेदारों ने गोली मारने की धमकी दी।

मजदूरों का कहना है कि रात करीब 3 बजे वे जान बचाकर खेत से निकलकर चरोदा के एक मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने रात गुजारी। मजदूरों ने घटना का वीडियो भी बनाया है, जिसमें बातचीत रिकॉर्ड हुई है।

हालांकि वीडियो में किसी का चेहरा स्पष्ट नहीं है। इसके बाद मजदूर एसडीएम कार्यालय, एसपी ऑफिस और दोबारा एसडीएम कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत दी।

ठेकेदार बोला- कोई विवाद नहीं है, पुलिस ही बताएगी सब

वहीं ठेकेदार जोगेंद्र ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उसका कहना है कि मजदूरों से उसका कोई विवाद नहीं है। जो भी जानना है पुलिस से बात कर लीजिए। वहीं इस पूरे मामले में सीएसपी प्रशांत कुमार ने बताया कि मजदूरों को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे सामने नहीं आए।

ठेकेदार के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई है। मजदूरों को भगाने के आरोपों से पुलिस ने इनकार किया है। दोनों पक्षों को दोबारा बुलाकर बातचीत कराने की बात कही गई है

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