औद्योगिक अपशिष्ट से प्रदूषित हो रही खारून नदी, बीरगांव के लिए बढ़ा जल संकट
खारून नदी में उद्योगों से निकलने वाला गंदा और बिना शोधन किया गया पानी लगातार मिल रहा है, जिससे बीरगांव की जल आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है। खराब सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम और लापरवाही के कारण नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से होकर बहने वाली खारून नदी एक बार फिर गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गई है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा और रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे बीरगांव की पेयजल आपूर्ति पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ उद्योगों और नालों से निकलने वाला दूषित पानी बिना किसी शोधन के नदी में मिल रहा है। नदी के किनारे झागदार पानी, दुर्गंध और काले रंग का बहाव स्पष्ट रूप से प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लंबे समय से ठीक से कार्य नहीं कर रहा, जिसके कारण यह स्थिति बनी हुई है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खारून नदी से ही बीरगांव के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है। प्रदूषित पानी के लगातार नदी में मिलने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जानकारी होने की बात स्वीकार की है। अधिकारियों का कहना है कि STP की मरम्मत, औद्योगिक इकाइयों की जांच और दोषी संस्थानों पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारियों को भी स्थिति से अवगत कराया गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो खारून नदी का पानी पूरी तरह अनुपयोगी हो सकता है। यह न केवल जल संकट को बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट को भी जन्म दे सकता है।
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