ईरान में क्यों भड़क उठे विरोध प्रदर्शन? जानिए आंदोलन की जड़, हिंसा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अमेरिका को दी गई चेतावनी की पूरी कहानी
ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक दमन के खिलाफ भड़के जनआंदोलन में सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें हैं। हालात के बीच ईरान ने अमेरिका को चेताया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा। पढ़िए पूरे संकट की विस्तार से कहानी।
ईरान एक बार फिर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। देश के कई शहरों में सरकार के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक नाराज़गी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह आंदोलन सत्ता व्यवस्था और धार्मिक शासन के खिलाफ खुले विद्रोह का रूप ले चुका है।
विरोध प्रदर्शन क्यों शुरू हुए?
ईरान में लंबे समय से आम जनता महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा अवमूल्यन, ईंधन संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से परेशान है। रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें इतनी बढ़ गईं कि आम परिवारों का गुजारा मुश्किल हो गया।
इन हालात में जब सरकार से राहत नहीं मिली, तो गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।
धीरे-धीरे आर्थिक मांगें राजनीतिक नारों में बदल गईं। प्रदर्शनकारियों ने पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और सख्त धार्मिक नियंत्रण खत्म करने की मांग शुरू कर दी।
हिंसा और मौतों का सिलसिला
सरकार ने इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कड़ा दमन शुरू किया।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई, झड़पों और गिरफ्तारियों के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जबकि हजारों को हिरासत में लिया गया है।
इंटरनेट सेवाएं कई इलाकों में बंद कर दी गईं ताकि सूचनाओं का प्रवाह रोका जा सके।
सरकार का रुख
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यह आंदोलन विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित साजिश है। सरकार का आरोप है कि पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका और उसके सहयोगी, देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी दावे के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों को “कठोर कार्रवाई” की खुली छूट दी गई है।
🇺🇸 अमेरिका से टकराव क्यों बढ़ा?
जैसे-जैसे हालात बिगड़े, अमेरिका ने ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए और सख्त बयानबाजी शुरू की।
इसके जवाब में ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप किया, तो उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई झेलनी पड़ेगी।
ईरानी नेतृत्व ने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में इसका असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
ईरान की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर है। कई देश अपने नागरिकों को सतर्क रहने या ईरान छोड़ने की सलाह दे चुके हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह संकट कूटनीतिक स्तर पर नहीं सुलझा, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है।
आगे क्या?
ईरान फिलहाल दो मोर्चों पर दबाव झेल रहा है —
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अंदरूनी स्तर पर जनता का गुस्सा
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बाहर अंतरराष्ट्रीय तनाव
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह हालात को शांत करे या फिर सख्ती के रास्ते पर और आगे बढ़े। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह आंदोलन दबेगा या इतिहास में एक बड़े बदलाव की नींव बनेगा।
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