सर्दी-जुकाम ही नहीं, कान में भी संक्रमण का खतरा! जानें कैसे करें बचाव
मौसम बदलने पर तापमान और हवा की नमी में बदलाव आता है. इस दौरान कान के अंदर बैक्टीरिया और वायरस जल्दी बढ़ जाते हैं और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. सर्दी, खांसी, फ्लू या नाक बंद रहने पर कान के अंदर दबाव बदलता है, जिससे कान भारी लगना या दर्द जैसी समस्या हो सकती है. शुरुआती संकेतों में कान में दर्द, हल्की गूंज, सुनने में थोड़ी परेशानी और कभी-कभी हल्का पानी जैसा डिस्चार्ज दिख सकता है. बच्चे, बुजुर्ग और जिनकी इम्यूनिटी कम है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. अगर कान में तेज दर्द, चक्कर या बहुत भारीपन लगे तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है, नहीं तो समस्या बढ़ सकती है.
मौसम बदलने के समय सिर्फ इंफेक्शन ही नहीं, बल्कि कान में मैल जमा होना, कान बंद लगना, दबाव में बदलाव और आवाजें गूंजना जैसी परेशानी भी हो सकती है. कई बार तेज आवाज सुनने पर असहजता महसूस होने लगती है. इस समय साइनस और गले का इंफेक्शन भी बढ़ जाता है, जो कान तक असर डाल सकता है. इसी समय ठंडी हवा सीधे कान में लगने पर इर्रिटेशन जल्दी बढ़ जाता है, खासकर बाइक पर चलते समय. अगर ध्यान न रखा जाए तो कान की समस्या बढ़ सकती है और इंफेक्शन जल्दी फैल सकता है.
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