छत्तीसगढ़ के बीजापुर में इंद्रावती नदी में नाव पलटने से एक ही परिवार के 4 लोग तेज बहाव में बह गए

Jan 22, 2026 - 11:03
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में इंद्रावती नदी में नाव पलटने से एक ही परिवार के 4 लोग तेज बहाव में बह गए

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में इंद्रावती नदी में नाव पलटने से एक ही परिवार के 4 लोग तेज बहाव में बह गए। 18 घंटे बाद मां-बेटी की लाश रेस्क्यू टीम ने खोज निकाला है। मां के साथ दुधमुंही बच्ची टावेल से बंधी मिली है। पिता और एक बच्चे की तलाश जारी है। नाव में कुल 5 लोग सवार थे, जिनमें से एक महिला को स्थानीय लोगों ने बचा लिया था। घटना 21 जनवरी की शाम करीब 5 बजे भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उसपरी झिल्ली घाट पर हुई। सभी पीड़ित इंद्रावती नदी पार स्थित बोड़गा गांव के रहने वाले थे। वे बाजार से अपने घर लौट रहे थे, तभी नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। देर से शुरू हुई सर्चिंग

इंद्रावती नदी जिले से 80 किलोमीटर दूर है। आज सुबह नगर सेना की टीम मोटरबोट से जा रही थी रास्ते में गाड़ी खराब होने की वजह से घाट पर मोटरबोट देर से पहुंची। जिसके कारण सर्चिंग का काम देर से शुरू हुआ।

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी भी उसपरी घाट पहुंचे हैं। घटना वाली रात विधायक ने बोडगा गांव के लोगों से फोन पर बातचीत कर जानकारी ली थी। अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

बाजार से लौट रहे थे, तभी हुआ हादसा

बीएमओ भैरमगढ़ रमेश तिग्गा ने बताया की पति-पत्नी और उसके दो बच्चे सहित कुल 4 लोग लापता थे, जिनमें से एक महिला और उसकी दुधमुंही बेटी का शव निकाल लिया गया। एक महिला जो बच गई है वो अपने गांव बोड़गा लौट गई।

नदी से गांव वालों ने उन्हें बचा लिया था। उसपरी घाट से बोड़गा गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर है। उसपरी बाजार आकर वापस गांव लौटने के दौरान हादसा हुआ। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट पर रखा गया है। रात होने से नहीं टला था अभियान

तहसीलदार सूर्यकांत ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई थीं। नगर सेना (होमगार्ड) को भी सूचित कर बुलाया गया। शाम होने के कारण बचाव अभियान शुरू नहीं हो सका। नगर सेना की टीम ने आज सुबह मोटर बोट की सहायता से लापता लोगों की तलाश जारी है।

हर साल होते है कई हादसे

इंद्रावती नदी के पार स्थित दर्जनों गांवों के निवासियों के लिए पीडीएस राशन लाने या बाजार आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है। इस नदी के घाटों पर नाव पलटने से हर साल कई लोगों की जान चली जाती है।

यह वही उसपरी घाट है, जिसे पार कर सेंट्रल कमेटी सदस्य रूपेश अपने 140 साथियों के साथ हथियार लेकर नाव से आत्मसमर्पण करने आया था।

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